कितने दिन हुए तुमसे मिले
उदास है मेरे शाम-ओ-सेहर
उदास है मेरा हर लम्हां
दिल से निकल कर होठो
तक आती हैं पीर
तुम्हारे काँधे मेरे अश्को से
भीगे हुए,कितने दिन हुए
अपनी यादों में तुम्हें
पुँकारती हू अक्सर
तुम कहो ना कहो
उदास है मेरे शाम-ओ-सेहर
उदास है मेरा हर लम्हां
दिल से निकल कर होठो
तक आती हैं पीर
तुम्हारे काँधे मेरे अश्को से
भीगे हुए,कितने दिन हुए
अपनी यादों में तुम्हें
पुँकारती हू अक्सर
तुम कहो ना कहो
तुम्हारी चाहत का भी
एहसास है मुझे
तुम्हारी बाहों के पंख खुले
कितने दिन हुए
कितने दिन हुए तुमसे मिले....
एहसास है मुझे
तुम्हारी बाहों के पंख खुले
कितने दिन हुए
कितने दिन हुए तुमसे मिले....
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khubsurat ahsaaas.......
ReplyDeleteshukriya Mukesh ji..... :-)
Deleteबहुत खूब ... गहरा एहसास लिए ... मिलन की प्यास लिए रचना ...
ReplyDeleteशुक्रिया दिगम्बर नासवा जी.... :-)
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